Posts Tagged ‘गजल’

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

उनके होठो पे तबसुम कोई प्यारा नही देखा

फिर निगाहों ने कोई ख्वाब दोबारा नही देखा

बारहा महके है गुज़रे हुए मौसम का खयाल

कफस में फिर कभी गुलज़ार नज़ारा नहीं देखा

शब को रोशन करें ये चाँद सितारे सारे

करे जो रूह को रोशन वो सितारा नही देखा

तिश्नगी रूह की मेरी जो बुझाये कोई

अब तलक अब्र कोई ऐसा आवारा नही देखा

यूँ तो जज़्बा भी, हौसला भी तमन्ना भी थी

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

जाने क्यूँ महका गुजरे हुये मौसम का खयाल

हमने सदियों से गुलज़ार का नज़ारा नही देखा

ये क्या किया

(ये क्या किया )

मेरी वफा को तार तार किया

तुने क्या रंग इख़्तियार किया

कितना अजीम है वो शख्स हमे

हमने जिसपे था जांनिसार किया

अब तुझसे क्या कहे ऐ दोस्त

तेरी आरजू ने हमे बेजार किया

नफरत कि जो आग है दिलो में

उसने खुद हमे शर्मशार किया

तलबगार है फूलो के बहुत मगर

काँटों से खुद को गिरफ्तार किया

(3/2/2010-अनु)

कतरा कतरा इल्तिजा करे तो क्या मिले

कतरा कतरा इल्तिजा करे तो क्या मिले

न अश्के दरिया मिले और न उरूजे वफ़ा मिले

है जिंदगी कि दौड में शामिल हर एक शख्स

हर कोई चाहता है उसे रास्ता मिले

हमको न पढा कीजिये औरों की नजर से

चेहरा न पढ़ सके तो किताबो में क्या मिले

हर बार रिश्तों को समझने कि आरजू में

जो भी मिले सनम वो हमे बेवफा मिले

लगता है नए दौर ए रिवाजों में ये लाजिम

जिसकी खता नहीं हो उसीको सजा मिले

(22/2/2010-अनु)