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डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

उनके होठो पे तबसुम कोई प्यारा नही देखा

फिर निगाहों ने कोई ख्वाब दोबारा नही देखा

बारहा महके है गुज़रे हुए मौसम का खयाल

कफस में फिर कभी गुलज़ार नज़ारा नहीं देखा

शब को रोशन करें ये चाँद सितारे सारे

करे जो रूह को रोशन वो सितारा नही देखा

तिश्नगी रूह की मेरी जो बुझाये कोई

अब तलक अब्र कोई ऐसा आवारा नही देखा

यूँ तो जज़्बा भी, हौसला भी तमन्ना भी थी

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

जाने क्यूँ महका गुजरे हुये मौसम का खयाल

हमने सदियों से गुलज़ार का नज़ारा नही देखा

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है

यहाँ मोहोबत करना आसां नहीं है

उनकी यादो का साया है साथ मेरे

क्या हुआ जो सर पर आसमां नहीं है

पीकर अक्सर बेअसुल हो जातेहो तुम

पर जानती हूँ मै दिल तेरा शैतां नहीं है

खुदा की बख्स है चल रही है सांसेवरना जीने का मुझको अरमां नहीं है

मेरी बर्बादियो का तुम गम ना करो

इस दिल में अब कोई तूफान नहीं है

क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है

दर्द है दिल में और दिल परेशान है

बस यही दर्द अब मेरी पहचान है

 

हम तेरी  आरजू में  फना होगये

मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है

 

अपना जीना फकत एक एहसास है

जिस्म में  जिंदगी जैसे मेहमान है

 

हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ

पर लबो की  हँसी भी तो  बेजान है

 

तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता

क्या करूं क्या करूं  इश्क नादान है

 

मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा

फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है

 

हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन

बस इक ताजी हवा का ही अरमान है

 

हर पल बिकता यहाँ ईमान है

कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है