प्यार की हद से ज्यादा प्यार किया

index1
कभी नजर से गिरा दिया

कभी दिल में बसा दिया

मुहब्बत में तुमने हमे

कभी हंसा तो कभी रुला दिया

कभी प्यार बेसुमार किया

कभी दर्द बेइंतिहा दिया

अपनी दीवानगी में तुमने हमे

किस मक़ाम पर पंहुचा दिया

कभी मुसान में भर मिला दिया

कभी सेहरा में तन्हा कर दिया

दिल को खिलौना समझ कर तुमने

हमे हर खेल में हरा दिया

कभी उम्मीदों को बढा दिया

कभी मायूसियो ने जीना दुश्वार किया

फिर भी हमदम हम ने तुम्हें

प्यार की हद से ज्यादा प्यार किया

Advertisements

पलकों में पालती रही दिन इंतजार के

Woman eye ऐ मेरे सनम तेरी महोब्बत में हार के
यूँ ही चले जाएगे शबे गम गुजार के


है मयकदा वीरान और सागर उदास है
जाने से उनके रूठ गए दिन बहार के


हम टूट भले जाएँगे शिकवा न करेंगे
हमपे करम बहुत हैं उस सितमगार के


ख्वाबो के ही आलम में आजाये वो कभी
पलकों में पालती रही दिन इंतजार के


फिर तोड़ के दीवार अना की पुकार लो
फिर देख लूँ मै हौसले अपने भी यार के

क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है

दर्द है दिल में और दिल परेशान है

बस यही दर्द अब मेरी पहचान है

 

हम तेरी  आरजू में  फना होगये

मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है

 

अपना जीना फकत एक एहसास है

जिस्म में  जिंदगी जैसे मेहमान है

 

हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ

पर लबो की  हँसी भी तो  बेजान है

 

तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता

क्या करूं क्या करूं  इश्क नादान है

 

मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा

फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है

 

हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन

बस इक ताजी हवा का ही अरमान है

 

हर पल बिकता यहाँ ईमान है

कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है

 

प्यार का दिया हवाओं में जला रक्खा है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सहराए जीस्त में गुलदान सजा रखा है
प्यार का दिया हवाओ में जला रखा है

रोज़ ख़्वाबों में गिला करता है वफाओं की
एक मुद्दत से हमें जिसने भुला रखा है

जाने वाले पलट के अलविदा तो कह जाते
दिल को उम्मीद के साये में बिठा रखा है

याद करते ही उन्हें डबडबा गयी आंखे
जाने हमने भी ये क्या रोग लगा रखा है

फूल का खुशबू से नाता सदा नहीं रहता
प्यार के लिए जुदाई का सिला रखा है
(अनु २६/१२/२०१०)

बेसबब हम अश्क बहाए जाते है

उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ

मेरे जख्मो के जो मिल जाते निशां
तन्हा होती मै न जिंदगी होती वीरां

तेज आंधियों ने जो बुझाये है दिए
उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ

तुम गर तोड़ दोगे यूँ आईने मेरे
इन टूटी तस्वीरों को मै देदुंगी जुबाँ

कल रात तेरी याद में रोते ही रहे
संग रोने लगी ये सावन की घटा

ऐसी राहों से भी हम गुजरे है जहा
गमों की धूप थी सर पे था खुला आसमां

आपने ही एहसासों के हाथो हुई जख्मी
मुझको तुमसे तो ना था कोई शिकवा

इन सूनी उदास रातो के दर्द से
कौन जाने हम कब होजाये फ़ना

ना उमीदी को करो न खुद पे सवार
अभी खुशबु ए जिंदगी है और है नया समां

उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ

मेरे जख्मो के जो मिल जाते निशां
तन्हा होती मै न जिंदगी होती वीरां

तेज आंधियों ने जो बुझाये है दिए
उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ

तुम गर तोड़ दोगे यूँ आईने मेरे
इन टूटी तस्वीरों को मै देदुंगी जुबाँ

कल रात तेरी याद में रोते ही रहे
संग रोने लगी ये सावन की घटा

ऐसी राहों से भी हम गुजरे है जहा
गमों की धूप थी सर पे था खुला आसमां

आपने ही एहसासों के हाथो हुई जख्मी
मुझको तुमसे तो ना था कोई शिकवा

इन सूनी उदास रातो के दर्द से
कौन जाने हम कब होजाये फ़ना

ना उमीदी को करो न खुद पे सवार
अभी खुशबु ए जिंदगी है और है नया समां