Archive for the ‘भारत’ Category

 

ये जख्मे जिगर हम उठाए कैसे

तुम ही कहो अब मुस्कुराए कैसे

 

आते है बार बार मेरी आंख मे आंसू

हम अश्क अपने उनसे छुपाए कैसे

 

तेरी यादो से ही रौशन है मेरी दुनिया

ये दिया अपने हाथो से बुझाए कैसे

 

जुबां खुलती नही मेरी तेरी महफिल मे

इस भरे बज्म हम गीत सुनाए कैसे 

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डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

उनके होठो पे तबसुम कोई प्यारा नही देखा

फिर निगाहों ने कोई ख्वाब दोबारा नही देखा

बारहा महके है गुज़रे हुए मौसम का खयाल

कफस में फिर कभी गुलज़ार नज़ारा नहीं देखा

शब को रोशन करें ये चाँद सितारे सारे

करे जो रूह को रोशन वो सितारा नही देखा

तिश्नगी रूह की मेरी जो बुझाये कोई

अब तलक अब्र कोई ऐसा आवारा नही देखा

यूँ तो जज़्बा भी, हौसला भी तमन्ना भी थी

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा

जाने क्यूँ महका गुजरे हुये मौसम का खयाल

हमने सदियों से गुलज़ार का नज़ारा नही देखा

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है

यहाँ मोहोबत करना आसां नहीं है

उनकी यादो का साया है साथ मेरे

क्या हुआ जो सर पर आसमां नहीं है

पीकर अक्सर बेअसुल हो जातेहो तुम

पर जानती हूँ मै दिल तेरा शैतां नहीं है

खुदा की बख्स है चल रही है सांसेवरना जीने का मुझको अरमां नहीं है

मेरी बर्बादियो का तुम गम ना करो

इस दिल में अब कोई तूफान नहीं है

प्यार की हद से ज्यादा प्यार किया

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कभी नजर से गिरा दिया

कभी दिल में बसा दिया

मुहब्बत में तुमने हमे

कभी हंसा तो कभी रुला दिया

कभी प्यार बेसुमार किया

कभी दर्द बेइंतिहा दिया

अपनी दीवानगी में तुमने हमे

किस मक़ाम पर पंहुचा दिया

कभी मुसान में भर मिला दिया

कभी सेहरा में तन्हा कर दिया

दिल को खिलौना समझ कर तुमने

हमे हर खेल में हरा दिया

कभी उम्मीदों को बढा दिया

कभी मायूसियो ने जीना दुश्वार किया

फिर भी हमदम हम ने तुम्हें

प्यार की हद से ज्यादा प्यार किया

पलकों में पालती रही दिन इंतजार के

Woman eye ऐ मेरे सनम तेरी महोब्बत में हार के
यूँ ही चले जाएगे शबे गम गुजार के


है मयकदा वीरान और सागर उदास है
जाने से उनके रूठ गए दिन बहार के


हम टूट भले जाएँगे शिकवा न करेंगे
हमपे करम बहुत हैं उस सितमगार के


ख्वाबो के ही आलम में आजाये वो कभी
पलकों में पालती रही दिन इंतजार के


फिर तोड़ के दीवार अना की पुकार लो
फिर देख लूँ मै हौसले अपने भी यार के

क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है

दर्द है दिल में और दिल परेशान है

बस यही दर्द अब मेरी पहचान है

 

हम तेरी  आरजू में  फना होगये

मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है

 

अपना जीना फकत एक एहसास है

जिस्म में  जिंदगी जैसे मेहमान है

 

हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ

पर लबो की  हँसी भी तो  बेजान है

 

तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता

क्या करूं क्या करूं  इश्क नादान है

 

मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा

फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है

 

हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन

बस इक ताजी हवा का ही अरमान है

 

हर पल बिकता यहाँ ईमान है

कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है