अगरचे मुझे तुमसे प्यार न होता

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हर सिम्त मेरा दिल ये बेकरार न होता

हमदम अगरचे मुझे तुमसे प्यार न होता

 

कल अजनबी थे आज एक जान होँ जैसे

दोनों की अब तो एक ही पहचान हो जैसे

इतना हसीन तब तो ये संसार न होता

हमदम अगरचे मुझे तुमसे प्यार न होता

मेरी निगाहों मे तेरी तस्वीर बसी है

तुम ही खुशी हमारी तुमसे ही हंसी है

यूँ सुबहो शाम तेरा इन्तजार न होता

हमदम अगरचे मुझे तुमसे प्यार न होता

तुम आये मोहोब्बत से कायनात भर गयी

महके हुए जज्बातों की दुनिया संवर गयी

बिन तेरे चमन दिल का गुलज़ार ना होता

हमदम अगरचे मुझे तुमसे प्यार न होता

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4 responses to this post.

  1. सुंदर रचना … बधाई

    प्रतिक्रिया

  2. Posted by Avinash....... on 29/06/2012 at 4:55 अपराह्न

    bahut hi achchhi kavita hai ye aapki…

    प्रतिक्रिया

  3. Posted by ravinandan singh on 01/05/2013 at 9:19 अपराह्न

    aur badhai k liye mere pas words nahi bache……….thanks

    प्रतिक्रिया

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