बाजी तो दिल की तुम भी हारे

हर रोज नए ख्वाब के इशारे

ये मुहब्बत के है झूठे सहारे

हम न जीते तो क्या हुआ

बाजी तो दिल की तुम भी हारे

शब का रास्ता पूछने वाले

नजाने कैसे अपना दिन गुजारे

झूठ है वो जो हम समझते है

कर्ज वफा के है तुमने उतारे

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5 responses to this post.

  1. bahoot khoob… par mohabbat mein jeene ka yahi to ek maza hai ki aapko koi rok nahi hoti, jitne man chaho utne khwaab dekho… aur hai to ek saza bhi, yadi dil toote to… par mohabbat hai to mohabbat hi… isame jeene waalon kee baat hi kuchh niraali hoti hai…

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    प्रतिक्रिया

  3. ……………..-वाह! बहुत उम्दा!!

    प्रतिक्रिया

  4. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं.
    आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

    प्रतिक्रिया

  5. बढ़िया रचना है!
    लिखने में नियमित रहो!

    प्रतिक्रिया

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