बाजी तो दिल की तुम भी हारे

हर रोज नए ख्वाब के इशारे
ये मुहब्बत के है झूठे सहारे

हम न जीते तो क्या हुआ
बाजी तो दिल की तुम भी हारे

शब का रास्ता पूछने वाले
नजाने कैसे अपना दिन गुजारे

झूठ है वो जो हम समझते है
कर्ज वफा के है तुमने उतारे

( 14/2/2010-अनु)

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3 responses to this post.

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

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  2. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए…. खूबसूरत रचना……

    प्रतिक्रिया

  3. wah bahut acchhe alfaaz…ek sunder rachna..jise padh kar vo geet yaad aa gaya…

    o basanti pawan pagal na ja re na ja…roko koi
    yad kar tune kaha tha pyar se sansaar hai..
    ham jo hare dil ki bazi ye teri hi haar hai..

    प्रतिक्रिया

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