बिजलियाँ हम पे गिराने कि जरूरत क्या थी

बे सबब अश्क बहाने की जरूरत क्या थी
दर्दे दिल सबको दिखाने की जरूरत क्या थी

हम तो खुद हार गए आपकी मोहोब्बत में
जीत का जश्न मनाने की जरूरत क्या थी

गर शिकारी थे तो करते शिकार कोई नया
किसी घायल पर निशाने की जरूरत क्या थी

इतने नाजुक हैं कि सांसो से पिघल जाते है
बिजलियाँ हम पे गिराने कि जरूरत क्या थी
(24/2/2010अनु)

Posted via email from धड़कन

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5 responses to this post.

  1. अनु जी आदाब
    अच्छे शेर निकाले हैं….बधाई

    प्रतिक्रिया

  2. हम तो खुद हार गए आपकी मोहोब्बत में
    जीत का जश्न मनाने की जरूरत क्या थी
    wah
    bahut
    achhee

    प्रतिक्रिया

  3. ‘इतने नाजुक हैं कि सांसो से पिघल जाते है
    बिजलियाँ हम पे गिराने कि जरूरत क्या थी ‘
    बिजली विभाग में काम करते हैं ,फोकट की है थोक में
    और तुम्हे इसमें भी प्रोब्लम है ……………..
    दूसरा कोई होता तो बिजलियाँ घर ले आता
    हा हा हा
    साँसों से पिघलती थी जब दुबली पतली-सी नाजुक सी थी
    अब …………….छोड़ो भी बच्चे को दोष देती रहती हो हरदम …………
    हा हा हा

    प्रतिक्रिया

  4. अब बिजली विभाग में होने से क्या होता है …….
    वो बिजली है न ?……….. भाव ही नहीं देती

    प्रतिक्रिया

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